भोलू और वीरू की दोस्ती (Bholu aur Veeru ki Dosti)

अच्छी बातों को याद रखो ओर बुरी बातों को भूल जाओ

भोलू और वीरू की कहानी (Bholu aur Veeru ki Dosti) आज बच्चों के लिए ज़रूरी है।भोलू और वीरू नाम के दो दोस्त थे। दोनों का जन्म लगभग एक ही साल हुआ था। दोनों एक दूसरे के पड़ोसी थे। साथ-साथ पले बढ़े थे। साथ ही साथ उन दोनों ने विद्यालयी शिक्षा भी प्राप्त की थी। दोनो बड़े ही घनिष्ट मित्र थे। दोनों का नामांकन भी एक ही कॉलेज में हुआ। दोनों एक ही कॉलेज के एक ही क्लास में पढ़ते थे। दोनो साथ आते जाते, साथ बैठते थे। भोलू सीधा-साधा था। वह केवल वीरू के साथ ही हंसी मजाक करता। वीरू समझदार और साहसी लड़का था। दोनों एक दूसरे के पूरक थे।

खराब तैयारी गुस्सा दिलाती है (Bholu aur Veeru ki Dosti)

पढ़ते हुए तीन साल बीत चुके थे। कॉलेज के आखरी इम्तिहान शुरू होने वाले थे। वीरू कॉलेज का श्रेष्ठ धावक था, प्रतियोगिता के कारण उसकी तैयारी अच्छी नही हुई थी। दोनों दोस्त मन लगाकर पढ़ाई कर रहे थे। दोनों दोस्त अक्सर बगीचे में बैठकर पढ़ा करते थे। बगीचे में बहुत से बड़े छोटे चट्टान भी थे, वे उसी पर बैठ के पढ़ते थे। उसी समय की बात है, पढ़ाई के बीच भोलू को चाय पीने की इच्छा हुई। उसने वीरू से कहा, “चल चाय पीने चलते हैं”। वीरू की तैयारी तब तक अच्छी नहीं हुई थी। वीरू ने खींज कर बोला, “क्या पढ़ाई के बीच में तुझे चाय पीने जाना है? मेरी तैयारी से ज्यादा जरूरी है क्या तेरी चाय?” यह कह कर वीरू अपनी किताब में देखने लगा। परंतु, भोलू का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा था। वह चाय लेने चला गया।

गुस्से में दोस्त को मारा थप्पड़

कुछ समय बाद वह दो कप चाय लेकर बाग में पहुंचा। एक कप वीरू को दिया और एक खुद लेकर बैठ गया।।अपनी तैयारी से दुखी वीरू अपना गुस्सा भोलू पर उतरते हुए कहता है, “तुम्हें पढ़ाई लिखाई से तो कोई मतलब नहीं है। खुद भी तुम्हें चाय पीनी है और मेरे लिए भी तुम्हें चाय लानी है। तुम तो यही चाहते हो कि, मेरा समय चाय पीने में चला जाए और मैं फेल हो जाऊं।” यह कह कर वीरू ने चाय फेंक दी। भोलू को भी बुरा लगा। भोलू ने कहा, “मेरी वजह से तुम्हारी तैयारी खराब है क्या?” इस पर वीरू को और गुस्सा आ गया। उसने भोलू को एक तमाचा लगा दिया। तमाचा लगते ही भोलू के आंखों से आंसू निकल गए। भोलू चुपचाप एक लकड़ी लेकर मिट्टी पर लिखने लगा, ‘आज मेरे दोस्त ने गुस्से में मुझे मारा’। शाम हुई दिन बीत गया।

भोलू का बैग चोरी

अब इम्तिहान का दिन आ चुका था। भोलू और वीरू दोनों अपने और भी दोस्तों के साथ कॉलेज जा रहे थे। वीरू ने चलते चलते भोलू से पूछा, “तुम्हारा एडमिट कार्ड कहां है? तो भोलू ने उत्तर दिया “बैग में”। यह सुनकर वीरू ने भोलू से कहा, “एडमिट कार्ड और पेन जल्दी निकाल लो और पॉकेट में रखलो, एग्जाम हॉल में बैग ले जाने नही देंगे”। यह सुनकर भोलू अपने बैग से एडमिट कार्ड निकालने ही वाला था की, एक लड़का तेज़ी से साइकिल पर आया और भोलू का बैग छीन कर रोड की ओर भाग गया।

वीरू ने पकड़ लिया चोर 

भोलू भी उसके पीछे रोड के तरफ भाग। रोड पर बस, कार, दोपहिया वाहन सब तेज़ी से चल रहे थे। फिर क्या था, यह सब देख वीरू ने आव देखा ना ताव, भोलू के पीछे भागा। भोलू को सही सलामत रोड पार करवा कर, चोर के पीछे भागा। लाल बत्ती पहुंचते पहुंचते वीरू ने साईकल पे सवार चोर को धर दबोचा। दो मुक्के में ही साईकल सवार चोर को जमीन पर गिर दिया। उससे बैग वापिस ले लिया। लोग जमा होगये, जैसे ही उन्हें पता चला वह चोर है, उन लोगों ने भी उसकी पिटाई कर दी। जब बैग लेकर वीरू भोलू के पास पहुंचा, तो भोलू उसके गले लग कर रोने लगा। वीरू ने उसके पीठ को ठोकते हुए बोला, “जल्दी चल पगले एग्जाम भी है”।

सच्चे दोस्त की अच्छी बातें कभी नही भूलते (Bholu aur Veeru ki Dosti)

साथ में जितने भी कॉलेज के दोस्त चल रहे थे, वे सब इन दोनों को छोड़ कर एग्जाम देने पहुंच चुके थे। मुश्किल समय मे सच्चा दोस्त (Bholu aur Veeru ki Dosti) ही काम आता है। दोनों दोस्त परीक्षा हॉल में 15 मिनट लेट पहुंचे। फिर जल्दी जल्दी सारी प्रक्रियाएं पूरी कर परीक्षा दी। अब शाम हो चुकी थी।

वीरू भोलू को ढूंढते हुए बाग पहुंचा। वो वहां देखता है कि, भोलू एक चट्टान पर नुकीले औज़ार से लिख रहा है, ‘आज मेरे दोस्त ने मेरी जान भी बचाई ओर परीक्षा भी’। यह सब देख वीरू ने हस्ते हुए कहा, “इतनी मेहनत क्यों कर रहा है? उस दिन की तरह जमीन पे लिख देता।” तब भोलू ने बोला, “अच्छी बातों को हमेशा याद रखना चाहिए इसलिए पत्थर पर लिखो, जिसे मिटाना मुश्किल हो। परंतु, बुरी बातों को तो भूल जाना चाहिए, इसलिए वहां लिखो जहां से वो थोड़ी देर में अपने आप मिट जाएं।”

कर्म का फल (Karm Ka Fal) आज के समय के लिए बहुत प्रासंगिक है।